Friday, March 5, 2010

नारी

नारी
मानव तथा मनुषी , विद्वान एवं विदुषी तोह कई कहे जाते हैं!
पर यह जब एक होते हैं, तोह एक नया जीव जग में लाते हैं!
उसके बारे में कई सपने सजाते हैं,पर
उसके आने के समय विह्वल हो जाते हैं!
जो आ रहा है वोह चंदा है यह चांदनी सोंचने लग जाते हैं
चंदा का जीवन अहिं, हम आज चांदनी की कहानी सुनाते है!

खबर मिली है , चांदनी आई है, दिखाते हैं बहोत खुशियाँ लाई है
के अभी पहला अहि, अगली बार चंदा आयेगा, कहकर
लोग उनका दिल बहलाते हैं
यहाँ से शुरू होती है नारी की गाथा -
नारी , औरात , भार्या ..कई नामों से हम उसे बुलाते हैं
हम में से कई उसे विद्या तक न दिलाते हैं
कई बल विवाह कर उसका ही शोषद कर आते हैं
कन्या दान , माहादन किया है यह सोंचकर
पाप करने वालों में सर्वोच हो जाते हैं !

खुद के घर की लक्ष्मी हम उसे मानते नहीं,
दुसरे की लक्ष्मी बना कर दे आते हैं
एक अनजान के हाथों में अपना अंश दे आते हैं
और, वहां भी उसे जनात न मिल पाती,
वोह बेचारी रिश्तों के बोझ तले दब जाती है
वोह बेसहरी अपनी पहचान गवां आती है

ससुराल भी उसको लक्ष्मी, एक नारी जो धन लाती है
मानकर सताता है, कई तोह उसे
इश्वर के द्वार ही पहुंचा आता है!

घर के मंदिर में सब लक्ष्मी को पूजते हैं,
पर लक्ष्मी जब कई रूप में हमारे घर आती है, तोह
हम उसे यहाँ वहां फिराते हैं
यह कौन सा इन्साफ है, क्या हम औरत को एक ही रूप में चाहते हैं,
क्या हम सिफ\रफ उसे वैश्या ही बनाना चाहते हैं
एक की या कई के..काम उस से वही करवाते हैं

क्यूँ हम हर बुराई, हर बीमारी का दोषी औरत को ठहराते हैं!
ताली एक हाँथ से नहीं बजती, औरत खुद के ली यह काम न करती,
क्यूँ हम राधा मीरा के आगे सर झुकाते हैं,और
औरत को पहचान दिलाने को एक कदम न बढ़ाते हैं

शक्ति तोह देवता की भी नारी थी,
चलो वोह कुछ गलती कर गए, हमारे वेद ही नारी को, मनुष्य की कार का कारण कह गए
पर वोह वेदों के रचयिता भी, नारी का अंश थे, किसी नारी का ही वंश थे

वोह गलती कर गए, तुम सुधारों
खुद से नारी का आदर करना जानो
वोह तो बेटी, बहु, दादी नानी बन कर मर जाटी है
और हम कहते हैं, नारी कुछ न कर पाती है
अरे उसे जगह तोह दो, समाज में चलने की
इजात तोह दो, और हौंसला भी
देखो नारी मर्दों को पीछे कर जाएगी
जोह एक महँ पुरुष को पैदा करती है
वोह खुद महँ बन, दुनिया में जगमगाएगी..

यह विनती है हमारी,
नारी की लाज रखो!माँ बेहें , बेटी इन शब्दों का मान रह्को
मान के चलो, लड़की लक्ष्मी नहीं, सरस्वती का रूप है,
शक्ति का स्वरुप है
वोह अगर क्रोधित हो जाएगी, तो धरती विनष्ट हो जाएगी
नर नारी कोस अथ ही चलना है, आज के
वेदों का येही कहना है
अगर नारी मिट जाएगी, तोह नर की पहचान भी हट जाएगी

उम्मीद है इस लेखनी की, की
आज की नारी अपनी अलग पहचान बनेगी!

3 comments:

Anonymous said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Pranav said...

aapne kavita dwara gudh bhavnao ko prastut kiya hain.. excellanto!!

グリー said...

今年のクリスマスも後少しですね。グリー内でもクリスマスに備えて異性と交流を持つコミュニティが活発で、自分も今年のクリスマスにお陰で間に合いました!!みなさんもイブを一人で過ごさなくても良いように、グリーで異性をGETしよう

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