kabhi karwattein..badalte hain..
kabhi toh khat padhte hain...
guzar gaye jo lamhe...
unhe yaad karte hain..
kabhi aankhon mein akharte hain,,
kabhi hoton pe sajte hain..
behte hai fizzaaon mein..jo..
nagme teri chahat ke...
kabhi us mod chalte hain..
kabhi.. raahein hum takte hain..
manzil toh tum ho....toh
na jaane kyu bhatakte hain..
kabhi.. roshini..kabi andhere se darte hain..
mohaabat toh karte hain..
par..berukhi pe bilakhte hain..
kabhi unhe yaad karte hain..
kabhi yuun bhatakte hain..
This blog is for posting poems,articles etc. this blog gives an imaginative,poetic vision. it has got sensational poems,updated every day. so just read it,and comment for futher improvement. poems,entertainment,creative,creative writing,creativity,friends,fun,funny,indian,lifestyle,perspective, philosophy,review,reviews,stories,story,success,writers,writing,writings
Monday, August 2, 2010
Friday, June 25, 2010
Cold NiGHT
Lying on my lap,
For the First time you were so quiet!
I took your hands... And you didnt smiled...
baby ITs too numb,
I dont want you this way!
I Tried to touch your lips,
but my tears rolled down your cheeks so fast!
I could'nt move, baby i missed your spark!
See I dont want you this way
IT has been so beautiful, and its all i wanna say!
you lying on my lap, with smile on ur face!
I used to enjoy! ur curls..and
way they give me trouble..
BAby you know it all...
I loved the way to you,
my eyes used to say it all..
JUSt wish to say..baby
Its too numb!
i dont want you this way!
but i know you scared the cold,
So i never..loosen my hold..
I dont know where i went wrong!
Angel..came..and u were gone!
you got cold..and ur play stopped...
i touched you eyes!
bt u were gone!
baby i miss your play!
i wana be quiet,and listen to your talks,all day!
i wana fight with you..and make love to make it again!
all i have to say!
baby its too numb
I dont want you this way!
For the First time you were so quiet!
I took your hands... And you didnt smiled...
baby ITs too numb,
I dont want you this way!
I Tried to touch your lips,
but my tears rolled down your cheeks so fast!
I could'nt move, baby i missed your spark!
See I dont want you this way
IT has been so beautiful, and its all i wanna say!
you lying on my lap, with smile on ur face!
I used to enjoy! ur curls..and
way they give me trouble..
BAby you know it all...
I loved the way to you,
my eyes used to say it all..
JUSt wish to say..baby
Its too numb!
i dont want you this way!
but i know you scared the cold,
So i never..loosen my hold..
I dont know where i went wrong!
Angel..came..and u were gone!
you got cold..and ur play stopped...
i touched you eyes!
bt u were gone!
baby i miss your play!
i wana be quiet,and listen to your talks,all day!
i wana fight with you..and make love to make it again!
all i have to say!
baby its too numb
I dont want you this way!
Wednesday, March 17, 2010
क्यूँ सोंचता कहीं हो ना जाये सांझ
सोंच रहा था गंगा तट पर बैठे,
सूर्यास्त है निश्चित ,सूर्युदय के बाद
पर डर जाता हूँ सोंच , अगर शीघ्र आ गयी वोह सांझ
देख गंगा को मैंने सोंचा ,क्या जीवन है केवल एक नाट्य
मन विच्लिय्त है क्यूँ इसके अंत को लेकर
क्यूँ सोंचता कहीं हो ना जाये सांझ
सोंच रहा था गंगा तट पर बैठे ,
नाट्य ही है क्या मेरा रुदन, और मृगजल मेरी मुसकान
चित्त जिहर रहा था तभी सुना मैंने ,
सन्नाटे को चीरता एक विलाप,
दिखी दूर एक नवयौवना ,श्वेत चादर लपेटे
मन विचलित है क्यूँ इसके रुदन को लेकर
क्यूँ आतंकित हूँ साँझ को लेकर आज
देखा मैंने गंगा तट पर बैठे
ममता की लहर, और सिंदूर का विलाप
अंत था यह ,उस फौजी के पात्र का आज
मन गर्वित हुआ उस पात्र के अभिनय पर
तिरंगे की शान पे हो गयी जिसकी तरुणावस्था कुर्बान
देखा मैंने गंगा तट पर बैठे
फिर हो गयी सांझ
सूर्यास्त है निश्चित ,सूर्युदय के बाद
पर डर जाता हूँ सोंच , अगर शीघ्र आ गयी वोह सांझ
देख गंगा को मैंने सोंचा ,क्या जीवन है केवल एक नाट्य
मन विच्लिय्त है क्यूँ इसके अंत को लेकर
क्यूँ सोंचता कहीं हो ना जाये सांझ
सोंच रहा था गंगा तट पर बैठे ,
नाट्य ही है क्या मेरा रुदन, और मृगजल मेरी मुसकान
चित्त जिहर रहा था तभी सुना मैंने ,
सन्नाटे को चीरता एक विलाप,
दिखी दूर एक नवयौवना ,श्वेत चादर लपेटे
मन विचलित है क्यूँ इसके रुदन को लेकर
क्यूँ आतंकित हूँ साँझ को लेकर आज
देखा मैंने गंगा तट पर बैठे
ममता की लहर, और सिंदूर का विलाप
अंत था यह ,उस फौजी के पात्र का आज
मन गर्वित हुआ उस पात्र के अभिनय पर
तिरंगे की शान पे हो गयी जिसकी तरुणावस्था कुर्बान
देखा मैंने गंगा तट पर बैठे
फिर हो गयी सांझ
Friday, March 5, 2010
नारी
नारी
मानव तथा मनुषी , विद्वान एवं विदुषी तोह कई कहे जाते हैं!
पर यह जब एक होते हैं, तोह एक नया जीव जग में लाते हैं!
उसके बारे में कई सपने सजाते हैं,पर
उसके आने के समय विह्वल हो जाते हैं!
जो आ रहा है वोह चंदा है यह चांदनी सोंचने लग जाते हैं
चंदा का जीवन अहिं, हम आज चांदनी की कहानी सुनाते है!
खबर मिली है , चांदनी आई है, दिखाते हैं बहोत खुशियाँ लाई है
के अभी पहला अहि, अगली बार चंदा आयेगा, कहकर
लोग उनका दिल बहलाते हैं
यहाँ से शुरू होती है नारी की गाथा -
नारी , औरात , भार्या ..कई नामों से हम उसे बुलाते हैं
हम में से कई उसे विद्या तक न दिलाते हैं
कई बल विवाह कर उसका ही शोषद कर आते हैं
कन्या दान , माहादन किया है यह सोंचकर
पाप करने वालों में सर्वोच हो जाते हैं !
खुद के घर की लक्ष्मी हम उसे मानते नहीं,
दुसरे की लक्ष्मी बना कर दे आते हैं
एक अनजान के हाथों में अपना अंश दे आते हैं
और, वहां भी उसे जनात न मिल पाती,
वोह बेचारी रिश्तों के बोझ तले दब जाती है
वोह बेसहरी अपनी पहचान गवां आती है
ससुराल भी उसको लक्ष्मी, एक नारी जो धन लाती है
मानकर सताता है, कई तोह उसे
इश्वर के द्वार ही पहुंचा आता है!
घर के मंदिर में सब लक्ष्मी को पूजते हैं,
पर लक्ष्मी जब कई रूप में हमारे घर आती है, तोह
हम उसे यहाँ वहां फिराते हैं
यह कौन सा इन्साफ है, क्या हम औरत को एक ही रूप में चाहते हैं,
क्या हम सिफ\रफ उसे वैश्या ही बनाना चाहते हैं
एक की या कई के..काम उस से वही करवाते हैं
क्यूँ हम हर बुराई, हर बीमारी का दोषी औरत को ठहराते हैं!
ताली एक हाँथ से नहीं बजती, औरत खुद के ली यह काम न करती,
क्यूँ हम राधा मीरा के आगे सर झुकाते हैं,और
औरत को पहचान दिलाने को एक कदम न बढ़ाते हैं
शक्ति तोह देवता की भी नारी थी,
चलो वोह कुछ गलती कर गए, हमारे वेद ही नारी को, मनुष्य की कार का कारण कह गए
पर वोह वेदों के रचयिता भी, नारी का अंश थे, किसी नारी का ही वंश थे
वोह गलती कर गए, तुम सुधारों
खुद से नारी का आदर करना जानो
वोह तो बेटी, बहु, दादी नानी बन कर मर जाटी है
और हम कहते हैं, नारी कुछ न कर पाती है
अरे उसे जगह तोह दो, समाज में चलने की
इजात तोह दो, और हौंसला भी
देखो नारी मर्दों को पीछे कर जाएगी
जोह एक महँ पुरुष को पैदा करती है
वोह खुद महँ बन, दुनिया में जगमगाएगी..
यह विनती है हमारी,
नारी की लाज रखो!माँ बेहें , बेटी इन शब्दों का मान रह्को
मान के चलो, लड़की लक्ष्मी नहीं, सरस्वती का रूप है,
शक्ति का स्वरुप है
वोह अगर क्रोधित हो जाएगी, तो धरती विनष्ट हो जाएगी
नर नारी कोस अथ ही चलना है, आज के
वेदों का येही कहना है
अगर नारी मिट जाएगी, तोह नर की पहचान भी हट जाएगी
उम्मीद है इस लेखनी की, की
आज की नारी अपनी अलग पहचान बनेगी!
मानव तथा मनुषी , विद्वान एवं विदुषी तोह कई कहे जाते हैं!
पर यह जब एक होते हैं, तोह एक नया जीव जग में लाते हैं!
उसके बारे में कई सपने सजाते हैं,पर
उसके आने के समय विह्वल हो जाते हैं!
जो आ रहा है वोह चंदा है यह चांदनी सोंचने लग जाते हैं
चंदा का जीवन अहिं, हम आज चांदनी की कहानी सुनाते है!
खबर मिली है , चांदनी आई है, दिखाते हैं बहोत खुशियाँ लाई है
के अभी पहला अहि, अगली बार चंदा आयेगा, कहकर
लोग उनका दिल बहलाते हैं
यहाँ से शुरू होती है नारी की गाथा -
नारी , औरात , भार्या ..कई नामों से हम उसे बुलाते हैं
हम में से कई उसे विद्या तक न दिलाते हैं
कई बल विवाह कर उसका ही शोषद कर आते हैं
कन्या दान , माहादन किया है यह सोंचकर
पाप करने वालों में सर्वोच हो जाते हैं !
खुद के घर की लक्ष्मी हम उसे मानते नहीं,
दुसरे की लक्ष्मी बना कर दे आते हैं
एक अनजान के हाथों में अपना अंश दे आते हैं
और, वहां भी उसे जनात न मिल पाती,
वोह बेचारी रिश्तों के बोझ तले दब जाती है
वोह बेसहरी अपनी पहचान गवां आती है
ससुराल भी उसको लक्ष्मी, एक नारी जो धन लाती है
मानकर सताता है, कई तोह उसे
इश्वर के द्वार ही पहुंचा आता है!
घर के मंदिर में सब लक्ष्मी को पूजते हैं,
पर लक्ष्मी जब कई रूप में हमारे घर आती है, तोह
हम उसे यहाँ वहां फिराते हैं
यह कौन सा इन्साफ है, क्या हम औरत को एक ही रूप में चाहते हैं,
क्या हम सिफ\रफ उसे वैश्या ही बनाना चाहते हैं
एक की या कई के..काम उस से वही करवाते हैं
क्यूँ हम हर बुराई, हर बीमारी का दोषी औरत को ठहराते हैं!
ताली एक हाँथ से नहीं बजती, औरत खुद के ली यह काम न करती,
क्यूँ हम राधा मीरा के आगे सर झुकाते हैं,और
औरत को पहचान दिलाने को एक कदम न बढ़ाते हैं
शक्ति तोह देवता की भी नारी थी,
चलो वोह कुछ गलती कर गए, हमारे वेद ही नारी को, मनुष्य की कार का कारण कह गए
पर वोह वेदों के रचयिता भी, नारी का अंश थे, किसी नारी का ही वंश थे
वोह गलती कर गए, तुम सुधारों
खुद से नारी का आदर करना जानो
वोह तो बेटी, बहु, दादी नानी बन कर मर जाटी है
और हम कहते हैं, नारी कुछ न कर पाती है
अरे उसे जगह तोह दो, समाज में चलने की
इजात तोह दो, और हौंसला भी
देखो नारी मर्दों को पीछे कर जाएगी
जोह एक महँ पुरुष को पैदा करती है
वोह खुद महँ बन, दुनिया में जगमगाएगी..
यह विनती है हमारी,
नारी की लाज रखो!माँ बेहें , बेटी इन शब्दों का मान रह्को
मान के चलो, लड़की लक्ष्मी नहीं, सरस्वती का रूप है,
शक्ति का स्वरुप है
वोह अगर क्रोधित हो जाएगी, तो धरती विनष्ट हो जाएगी
नर नारी कोस अथ ही चलना है, आज के
वेदों का येही कहना है
अगर नारी मिट जाएगी, तोह नर की पहचान भी हट जाएगी
उम्मीद है इस लेखनी की, की
आज की नारी अपनी अलग पहचान बनेगी!
ayu 's version of meera bai ke dohe!
written in class 8
१ कोई कह तो दे, जो हम न कह सके
वोह सुन तो लें, हम ही दीवाने हैं क्या
परवाने वोह नहीं!
२ दीवानगी न जानी, परवानगी न जानी,
यह जो भी है, बस है ज़िन्दगी हमारी!
३ तुम परदेसी बन के चले जाओगे ,
किसी और के हो जाओगे!
फिर क्या हमे याद फर्माओगे!
हमे तो लगता है , अपने रंग में रंग जाओगे!
हमे भूल जाओगे, हमे भूल जाओगे!
४ आज वादा करते हैं, हम न भूल पाएँगे
तुम्हारे हैं, और शायद तुम्हारे ही रह कर धुल में मिल जाएंगे
कतरे बन हवा में उद्द जाएँगे, और वोह कतरे भी तुम्हे याद फरमाएंगे!
वादा करते हैं, तुम्हारे तोह शायद हो न पाएंगे !
पर किसी और के होना पड़ा, तोह जेते जी मर जाएँगे!
फिर मैं रह जाएगा , हम तोह तुम में मिल जाएगा
वादा करते हैं- हर पल याद फरमाएंगे!
याद फरमाएंगे !
१ कोई कह तो दे, जो हम न कह सके
वोह सुन तो लें, हम ही दीवाने हैं क्या
परवाने वोह नहीं!
२ दीवानगी न जानी, परवानगी न जानी,
यह जो भी है, बस है ज़िन्दगी हमारी!
३ तुम परदेसी बन के चले जाओगे ,
किसी और के हो जाओगे!
फिर क्या हमे याद फर्माओगे!
हमे तो लगता है , अपने रंग में रंग जाओगे!
हमे भूल जाओगे, हमे भूल जाओगे!
४ आज वादा करते हैं, हम न भूल पाएँगे
तुम्हारे हैं, और शायद तुम्हारे ही रह कर धुल में मिल जाएंगे
कतरे बन हवा में उद्द जाएँगे, और वोह कतरे भी तुम्हे याद फरमाएंगे!
वादा करते हैं, तुम्हारे तोह शायद हो न पाएंगे !
पर किसी और के होना पड़ा, तोह जेते जी मर जाएँगे!
फिर मैं रह जाएगा , हम तोह तुम में मिल जाएगा
वादा करते हैं- हर पल याद फरमाएंगे!
याद फरमाएंगे !
दोस्त
दोस्त
(5 years back)
गर फिरदौस के दिन लौट कर आते नहीं,
वोह दिन हमसे भुलाए जाते नहीं!
अपनों का दामन यूँ चूता की अब हम खुद को संभाल पाते नहीं
जो बचपन से अपना था , जहा बना
जिसके साथ जुदा हमारा हर सपना था
वोह साथी ही हमसे छूट गए
हम तोह एक पल में टूट गए
जब भी कोई ख़ुशी मानते हैं,
उन साथियों को याद फरमाते हैं
जिनके साथ की थी शैतानियाँ, लड़ते थे जिन से !
गूंजती थी जिनके साथ किलकारियां
उन्ही की याद में मोटू की लड़ , आँखों को नम्म कर जाती है
पर एक प्यारी से दोस्त के वादे पर ,
आँहों में सिमट जाती है, पलकें झुक जाती हैं
साथी यहाँ भी हैं, पर उन सा कहाँ
दोस्त यहाँ भी है, पर नवाबीपन जादा
बचपन जहां बीता उसके झारूखे को तरस जाते हैं
पुराने दूर हो गए, बेगाने हो गए
लगता है, कुछ अपने भी अनजाने हो गए!
अब जीवन नए के साथ काटना है,
समय की गति को स्वीकारना है!
पर तुम सब मुझे न भूलना - क्यूंकि
मुझे नहीं है सबको भुलाना
कभी मुझे भी याद फरमाना !
यादों की ओढ़ में लेखनी चुप गयी!
आँखें नम्म होकर फिर झुक गयी!
फिर झुक गयी!
(5 years back)
गर फिरदौस के दिन लौट कर आते नहीं,
वोह दिन हमसे भुलाए जाते नहीं!
अपनों का दामन यूँ चूता की अब हम खुद को संभाल पाते नहीं
जो बचपन से अपना था , जहा बना
जिसके साथ जुदा हमारा हर सपना था
वोह साथी ही हमसे छूट गए
हम तोह एक पल में टूट गए
जब भी कोई ख़ुशी मानते हैं,
उन साथियों को याद फरमाते हैं
जिनके साथ की थी शैतानियाँ, लड़ते थे जिन से !
गूंजती थी जिनके साथ किलकारियां
उन्ही की याद में मोटू की लड़ , आँखों को नम्म कर जाती है
पर एक प्यारी से दोस्त के वादे पर ,
आँहों में सिमट जाती है, पलकें झुक जाती हैं
साथी यहाँ भी हैं, पर उन सा कहाँ
दोस्त यहाँ भी है, पर नवाबीपन जादा
बचपन जहां बीता उसके झारूखे को तरस जाते हैं
पुराने दूर हो गए, बेगाने हो गए
लगता है, कुछ अपने भी अनजाने हो गए!
अब जीवन नए के साथ काटना है,
समय की गति को स्वीकारना है!
पर तुम सब मुझे न भूलना - क्यूंकि
मुझे नहीं है सबको भुलाना
कभी मुझे भी याद फरमाना !
यादों की ओढ़ में लेखनी चुप गयी!
आँखें नम्म होकर फिर झुक गयी!
फिर झुक गयी!
yeh jo yaaraana hai
yeh jo yaarana hai
deewana hai!
hum toh masti ki fizaaon mein
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
kabhi shartein lagate,
kabhi notein udaate,
kabhi filen churaate,
kabhi usko patate
kabhi fattu ko rulaate
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
kabhi soncha na tha!
ek din hum bichad jayenge
zamaane ki bheed mei kho jayenge
phir ek din milenge, aur bas
muskuraayenge
un fizzaaon mei
is dosti ke ye pal yaad ayenge
toh abhi
jee lo na yaar
yeh jo yaarana hai
deewana hai!
hum toh masti ki fizaaon mein
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
aao ghume sath!!
gaao aaj!
yaara hum dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
apni nayi pehchaan banane jhumte chal pade!
hum toh masti ki fizaaon mein
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
deewana hai!
hum toh masti ki fizaaon mein
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
kabhi shartein lagate,
kabhi notein udaate,
kabhi filen churaate,
kabhi usko patate
kabhi fattu ko rulaate
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
kabhi soncha na tha!
ek din hum bichad jayenge
zamaane ki bheed mei kho jayenge
phir ek din milenge, aur bas
muskuraayenge
un fizzaaon mei
is dosti ke ye pal yaad ayenge
toh abhi
jee lo na yaar
yeh jo yaarana hai
deewana hai!
hum toh masti ki fizaaon mein
dosti ke saayein mein
jhumte chal pade!
aao ghume sath!!
gaao aaj!
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jhumte chal pade!
apni nayi pehchaan banane jhumte chal pade!
hum toh masti ki fizaaon mein
dosti ke saayein mein
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